नागपुर | सामाजिक न्याय को कानून का केंद्र बनाने वाले मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस के. चंद्रू का सेंट्रल इंडिया कॉलेज ऑफ लॉ, नागपुर में सम्मान किया गया। कॉलेज के निदेशक डॉ. एस.एम. राजन एवं प्राचार्य डॉ. पल्लवी भावे ने उनसे भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर डॉ. राजन ने कहा कि जस्टिस चंद्रू ने अपने साढ़े छह वर्षों के न्यायिक कार्यकाल में करीब 96 हजार मामलों का निपटारा कर न्यायिक दक्षता और संवेदनशीलता की मिसाल कायम की। यह सम्मान परवाना मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित संविधान पर विशेष व्याख्यान के उपरांत दिया गया।जस्टिस चंद्रू ने कहा कि संविधान केवल कानून की किताब नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और न्याय का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने भविष्य में कॉलेज परिसर का दौरा करने की इच्छा भी व्यक्त की।
जब न्याय करुणा से जुड़ा : जस्टिस के. चंद्रू की मिसाल
पूर्व मद्रास हाईकोर्ट न्यायाधीश जस्टिस के. चंद्रू भारतीय न्यायपालिका के उन विरले चेहरों में शामिल हैं, जिन्होंने कानून को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया। अपने साढ़े छह वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने करीब 96 हजार मामलों का निपटारा कर न्यायिक इतिहास में अलग पहचान बनाई।1973 में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने श्रम, सेवा और आपराधिक मामलों में वकालत की। जुलाई 2006 में अतिरिक्त न्यायाधीश और नवंबर 2009 में स्थायी न्यायाधीश बने जस्टिस चंद्रू ने महिलाओं, श्रमिकों और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसले दिए।अपने निर्णयों में वे अक्सर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और पेरियार के विचारों का उल्लेख करते रहे।
कानून को बनाया सामाजिक बदलाव का औजार
जस्टिस के. चंद्रू अपने फैसलों में महिलाओं, श्रमिकों और वंचित वर्गों के अधिकारों की मजबूती से पैरवी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने संविधान को एक जीवंत दस्तावेज मानते हुए सामाजिक समानता से जुड़े कई ऐतिहासिक निर्णय दिए।
खास बातें
जन्म: 8 मई 1951, श्रीरंगम
मद्रास हाईकोर्ट में नियुक्ति: जुलाई 2006
स्थायी न्यायाधीश: नवंबर 2009
निपटाए गए मामले: लगभग 96,000
पहचान: सामाजिक न्याय के पक्षधर न्यायाधीश

सेंट्रल इंडिया कॉलेज ऑफ लॉ में जस्टिस के. चंद्रू का सम्मान करते निदेशक डॉ. एस.एम. राजन व प्राचार्य डॉ. पल्लवी भावे।
