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Gems of Maharashtra, their inspiring stories – a digital data.

nagpur

रेणुका बिडकर

छू ही लिया आसमां….

कहते हैं ना डर के आगे जीत है।अगर  हिम्मत हो और हौसला बरक़रार हो तो सफलता आपके कदम चूमने लगती है। रेणुका बिडकर एक ऐसी ही महिला है, जो भले ही  दिव्यांग हैं, लेकिन  अपनी  जिंदगी जीने के लिए उन्हें जो जद्दोजहद करनी पड़ी, उसकी कहानी ना केवल रोंगटे खड़े कर देने वाली है बल्कि हजारों- लाखों  दिव्यांगों को हिम्मत देने वाली भी है। मात्र एक वर्ष की नन्हीं सी उम्र में पोलियो व पैरालेसिस अटैक का शिकार हुई रेणुका ने हार नहीं मानी और आगे अपनी पढ़ाई जारी रखी व ग्रेजुएशन कर दिखाया। बात यहीं खत्म नहीं हुई । आगे चलकर उन्होंने विरजा अपंग संस्था बनाई जो मूकबघिर, अपंग,दिव्यांग लोगों के लिए बड़े-बड़े काम कर रही है। इन्होंने मूक बघिर बच्चों की शादी ही नहीं करवाई बल्कि 40 लोगों को कंपनियों में नौकरी दिलवाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। फिलहाल अस्वस्थ होने के कारण वे वर्षों से संस्था का काम नहीं कर रही है।रेणुका का जीवन न केवल दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत है बल्कि कई लोगों के लिए आशा का केंद्र भी है।

मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है।। पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।।

बैसाखियां बनीं सहारा

 अगर मजबूत इरादे और बुलंद हौसले दिल में हों तो उस व्यक्ति का रास्ता मौत भी नहीं रोक सकती. लाखों महिलाओं से हटकर रेणुका बिडकर ऐसी ही एक महिला हैं जिन्होंने न केवल खुद की एक स्वतंत्र पहचान बनाई बल्कि सैकड़ों दिव्यांगों की मदद और रोजगार की राह दिखा कर उनके दिलों में जगह भी बनाई. 
रेणुका सिर्फ एक महिला ही नहीं बल्कि अपने आप में एक संस्था हैं. शरीर से  दिव्यांग, लेकिन अपने इरादों से मजबूत रेणुका की कहानी में फूल भी हैं तो कांटे भी, रोमांच है तो दर्द भी और खुशी है तो गम भी. jरेणुका कहती हैं -" मेरी जिंदगी खुली किताब है, कोई छिपा राज नहीं.  
रेणुका जब मात्र एक साल की थीं तब दुर्भाग्य से वे पोलियो  और पैरालिसिस का शिकार हो गईं. जब वे बड़ी हुईं तो जिद्दी रेणुका ने हार नहीं मानी और ना ही अपनी हिम्मत को पस्त होने दिया. माता-पिता के स्नेह, प्यार और उनके आशीर्वाद से रेणुका ने दोनों कंधों को बैसाखी पर रखा और निकल पड़ी अपनी शिक्षा की राह पर. यह बैसाखियां 28/29 की आयु तक नहीं छूटी और उनके ही सहारे उन्होंने धनवटे नेशनल कॉलेज से.बीकॉम की डिग्री हासिल की. इसके बाद सायकोलॉजी में एमएस की शिक्षा पूर्ण की.

समाजसेवा का संकल्प

शरीर से दिव्यांग रहने से किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है, यह रेणुका भली-भांति जानती हैं.रेणुका के मन में दिव्यांगों, दृष्टिहीनों और मूक – बधिर जैसे लोगों के प्रति ऐसी सहानुभूति जागी कि उन्होंने उनके उद्धार व मदद हेतु समाजसेवा का संकल्प ले लिया. टाइपिंग व कंप्यूटर में दक्ष रेणुका एक बेहतरीन काउंसलर भी हैं. इस काउंसलिंग का उन्होंने अपनी समाजसेवा में उपयोग कर अनेक दिव्यांग, बेरोजगारों, महिलाओं का मार्गदर्शन किया. समाजसेवा को एक मंच मिले, अतः उन्होंने अपनी प्यारी बेटी विरजा के नाम पर ‘विरजा अपंग उत्थान संस्था’ ” 2005 में स्थापित की. यह आज भी अस्तित्व में है. लंबे समय से अस्वस्थ रहने की वजह से वे संस्था के लिए काम नहीं कर रही हैं.

शरीर से करीब 88 % डिसेबल रहने के बावजूद रेणुका ने अप्लास्टिक व एनीमिया जैसी बड़ी बीमारी से जूझकर अपनी माता आशा देवी के नाम पर ‘आशादीप गृह उद्योग की संकल्पना को साकार किया. आज यह संस्था उनकी व अन्य जरूरतमंद महिलाओं के लिए आशा की किरण बनी हुई है. उनके जीवन का बस एक ही मकसद है कि अंतिम सांस तक वे दिव्यांगों की सेवा व मदद कर सकें और उन्हें आत्मनिर्भर बना सकें. शरीर से अपाहिज पर इरादों से मजबूत रेणुका की जिंदगी उतार-चढ़ाव और संघर्षों से भरी रही, लेकिन उनके सुन्दर चेहरे पर दिखने वाली छिपी मुस्कान के दर्द को भला उनसे बेहतर और कौन एहसास कर सकता है?

जीवन परिचय : 
नाम : रेणुका गुलाबराव बिडकर
जन्मतिथि : 29.5.72
मोबाइल नं. : 9834434781,9823917772
ई- मेल : vausnagpur@gmail.com
पता : प्लॉट नं. एफ-11, प्रतिभा अपार्टमेंट, लक्ष्मीनगर, नागपुर-440022
शैक्षणिक योग्यता :
1.एम.एस. (साइकलॉजी)
2.डिप्लोमा इन कम्प्यूटर
अनुभव :
1.महिला सहकारी बैंक में कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम किया.
2.होटल सेंटर पाइंट में टेलीकॉलर के रूप में काम.
3.रिजाइस काउंसलिंग सेंटर में काउंसलर रहीं.
उपलब्धियां
1.विरजा अपंग संस्था व आशादीप गृहउद्योग की स्थापना की थी
2. मूक – बघिर बच्चों की शादियां करवाई.
3. 40 दिव्यांग बच्चों को कंपनियों में नौकरी दिलवाई.

देवेन्द्र फडणवीस

एक जुझारू नेता – 47 की उम्र में बने थे महाराष्ट्र के सीएम

देवेन्द्र फडणवीस एक भारतीय राजनेता हैं। महाराष्ट्र पूर्व के मुख्यमंत्री (कार्यकाल 23 नवंबर 2019 से 26 नवंबर 2019 तक) तथा राज्य के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तथा महाराष्ट्र विधानसभा में नागपुर दक्षिण पश्चिम से विधायक है। देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस महाराष्ट्र की राजनीति का वो नाम है जिसने अपने पिता से राजनीति विरासत मिलने के बावजूद अपनी अलग पहचान बनाई।

फड़नवीस ब्राह्मण परिवार से तालुक रखते हैं और उनके पिता गंगाधर राव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ में रहे हैं। वह महाराष्ट्र के 18 वें मुख्यमंत्री हैं। 22 जुलाई 1970 को नागपुर, महाराष्ट्र में ब्राह्मण परिवार में फडणवीस पैदा हुए। वह 44 वर्ष की उम्र में शरद पवार के बाद महाराष्ट्र के सबसे छोटे मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 31 अक्टूबर, 2014 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में सीएम पद की शपथ ली।

जीवन परिचय

फडणवीस ने नागपुर में सरस्वती विद्यालय, शंकर नगर चौक से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है।उन्होंने पांच साल की एकीकृत कानून की डिग्री के लिए नागपुर के सरकारी लॉ कॉलेज में दाखिला लिया, और 1 99 2 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बिजनेस मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर डिग्री और डीएसई, बर्लिन से परियोजना प्रबंधन में डिप्लोमा लिया। देवेंद्र ने 2006 में अमृता रानाडे से विवाह किया।

वह नागपुर में एक्सिस बैंक के एसोसिएट उपाध्यक्ष हैं। दोनों की एक बेटी है, जिसका नाम दिविजा फडणवीस है। फड़नवीस के पिता राज्य विधान परिषद के सदस्य भी रहे। फडनवीस अपने कॉलेज के दिनों में एबीवीपी के एक सक्रिय सदस्य थे।

27 साल की उम्र में बने मेयर

21 साल की उम्र में देवेंद्र फडणवीस नागपुर के नगर निगम के नगरसेवक नियुक्त किए गए. साल 1997 में मात्र 27 साल की उम्र में वो मेयर बने और साल 1997 से 2001 तक महापौर रहे. साल 1999 में वो नागपुर से विधायक बने तो साल 2001 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे. साल 2014 के विधानसभा चुनाव में देवेंद्र फडणवीस नागपुर के दक्षिण पश्चिम से विधायक बने.

बड़े फैसले भी लिए

पिछले साल मराठाओं ने आरक्षण को लेकर हिंसक आंदोलन भी किया था. जिसके बाद राज्य के 30 फीसदी मराठाओं को लुभाने के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 16 फीसदी आरक्षण देने का बिल पारित कर दिया गया. देवेंद्र फडणवीस का ये बड़ा सियासी दांव था. इसके अलावा देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के विकास का एजेंडा लेकर चल रहे हैं. उन्होंने राज्य को सूखा मुक्त करने के लिए सिंचाई व्यवस्था पर ज़ोर दिया. जलयुक्त शिवार की वजह से मौजूदा साल में सूखे में गिरावट देखी जा रही है. इसके अलावा पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने महानगरों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर दिया. देवेंद्र फडणवीस सरकार के कार्यकाल में छगन भुजबल की गिरफ्तारी से बड़ा संदेश भेजने की कोशिश की. लेकिन किसानों के मोर्चे पर फडणवीस सरकार का कर्जा माफ न करने वाला फैसला गैर सियासी लगता है.

बेदाग रहा सियासी सफर

देवेंद्र फडणवीस पर पार्टी के पुरजोर भरोसे की एकमात्र वजह उनकी बेदाग़ और युवा जोश से भरी सियासी यात्रा रही. संघ से जुड़ाव विरासत में मिला जिसने उन्हें बेहद ही अनुशासनप्रिय कार्यकर्ता बनाया और संघ की दीक्षा उनके सियासी जीवन में संजीवनी साबित हुई. लेकिन सीएम पद की अहम जिम्मेदारी से पहले वो राज्य के बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी के रूप में अनुभव हासिल कर चुके थे. उन्हें स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे का करीबी माना जाता था और उनके ही समर्थन से ये मुकाम मिल सका था. गोपीनाथ मुंडे के असामयिक निधन के बाद उस खालीपन को देवेंद्र फडणवीस ने भरने का काम किया और अपने राजनीतिक कौशल से विरोधियों को साधने में कामयाब हुए. जिसके बाद उनके सीएम बनने की राह पीएम मोदी की स्वीकारोक्ति से तय हो गई.

सियासी सफर
1992 – नागपुर के नगर निगम के नगरसेवक नियुक्त।
1997 – 27 साल की उम्र में मेयर बने। साल 1997 से 2001 तक महापौर रहे।
1999- नागपुर से विधायक बने।
2014- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने।
खास बातें
नाम: देवेन्द्र गंगाधरराव फडणवीस/जन्मदिन: 22 जुलाई 1970
व्यवसाय: भारतीय राजनीतिज्ञ
घर का पता- 276, धरमपेठ, त्रिकोणी पार्क-10
शौक: पढ़ना, लिखना
पसंदीदा नेता: नरेंद्र मोदी
खाने की आदत: वेजटेरियन
जाति : ब्राह्मण
राजीनीतिक पार्टी: भारतीय जनता पार्टी
राष्ट्रीयता: भारतीय/धर्म: हिन्दू