जालना. किसानों के लिए आई सरकारी राहत राशि पर उन्हीं जिम्मेदार अफसरों ने हाथ साफ कर दिया, जिन्हें मदद पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी। जालना जिले के अंबड और घनसावंगी तालुका में सामने आए 25 करोड़ रुपये के अतिवृष्टि अनुदान घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जमीन नहीं, फिर भी किसान
जांच में खुलासा हुआ कि भारी बारिश से प्रभावित किसानों के नाम पर फर्जी लाभार्थी तैयार कर 24 करोड़ 90 लाख 77 हजार 811 रुपये की राशि निकाल ली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि जिनके नाम पर एक गुंठा जमीन भी नहीं, उन्हें सरकारी पोर्टल पर किसान दिखाकर मुआवजा दिलाया गया।
सरकारी सिस्टम से छेड़छाड़
घोटाले को अंजाम देने के लिए तहसीलदारों के लॉगिन आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर सरकारी सिस्टम में छेड़छाड़ की गई। कागजी और डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश भी हुई, लेकिन तकनीकी जांच ने पूरा फर्जीवाड़ा उजागर कर दिया।
कई आरोपी हुए फरार
जिला कलेक्टर की जांच समिति की रिपोर्ट के बाद अंबड थाने में मामला दर्ज हुआ। कार्रवाई की भनक लगते ही कई आरोपी मोबाइल बंद कर फरार हो गए, लेकिन आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए सभी को पकड़ लिया।
30 आरोपी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में 22 तलाठी (पटवारी), 5 तहसील कर्मचारी, कलेक्टर कार्यालय का एक कर्मचारी, एक कंप्यूटर ऑपरेटर और एक नेटवर्क इंजीनियर शामिल हैं। हालांकि आर्थिक अपराध शाखा के सहायक पुलिस निरीक्षक मिथुन घुगे और उनकी टीम ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए 30 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।आर्थिक अपराध शाखा अब इस घोटाले की जड़ तक पहुंचने में जुटी है। आशंका है कि रकम और आरोपी दोनों बढ़ सकते हैं।