फिर भी साड़ी का जलवा बरकरार
संवाददाता | पैठण
सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल का असर अब पारंपरिक पैठनी साड़ियों पर साफ दिखाई दे रहा है। जो असली हैंडलूम पैठणी साड़ी पहले करीब एक लाख रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर दो लाख रुपये से अधिक हो गई है। इसके बावजूद, पैठण की असली पैठणी की मांग में कोई बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है।
सोने-चांदी के मोतियों का इस्तेमाल नहीं
पैठण के 300 से अधिक हैंडलूम बुनकरों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राहकों के बीच पैठण की असली पैठणी, येओला की पैठणी की तुलना में अधिक लोकप्रिय बनी हुई है। हालांकि सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के कारण अब अधिकांश ग्राहक साड़ियों में असली सोने और चांदी के मोतियों का इस्तेमाल नहीं करवा रहे, जिससे कीमत कुछ हद तक नियंत्रित रखी जा सके।

साड़ियों की मांग हुई कम
बुनकरों का कहना है कि मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई, बल्कि ग्राहक अब अपने बजट के अनुसार डिज़ाइन और मटेरियल चुन रहे हैं। पहले जहां हर महीने 50 से ज्यादा असली पैठनी बिकती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर करीब 30 पर आ गया है। फिर भी बाजार स्थिर बना हुआ है।
सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है
पैठणी साड़ी को महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पारंपरिक विरासत के रूप में देखा जाता है। रेशमी धागों से हैंडलूम पर बुनी जाने वाली यह साड़ी सिर्फ परिधान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है। कई महिलाओं के लिए कम से कम एक पैठणी अलमारी में होना आज भी प्रतिष्ठा से जुड़ा है।
नकली पैठणी साड़ियों की भरमार
इस बीच बाजार में मशीन से बनी और नकली पैठणी की भरमार ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। विक्रेता विक्की ढलकारी ने महिलाओं से अपील की है कि वे असली पैठणी की पहचान समझकर ही खरीदारी करें और संभव हो तो सीधे पैठण से ही साड़ी लें।कीमतों में उछाल के बावजूद साफ है कि पैठणी का आकर्षण कम नहीं हुआ है-बस अब यह शौक थोड़ा और महंगा जरूर हो गया है।
